CINDEREllA KI KAHANI

बचपन में हम अनेक कहानियां देखा, सुना और पढ़ा करते थे। हम में से कुछ की तो आदत ऐसी थी कि कहानी सुने बिना उन्हें नींद ही नहीं आती थी। और कुछ कहानियां ऐसी थी की वो हमारे जीवन का ऐसा हिस्सा बन गई कि हम उन्हीं के सपने देखा करते थे ऐसी ही कुछ कहानियों में से एक है – Cinderella ki kahani.

आईये जानते हैं सिंडिरेल्ला की पूरी कहानी

एक समय की बात है, किसी राज्य में एक व्यापारी रहा करता था। उस व्यापारी की एक छोटी सी बेटी थी, जिसका नाम था एला। एला बहुत ही प्यारी और नेक बच्ची थी। उसके पिता उस से बहुत प्यार करते थे और उसकी सारी ज़रूरते पूरी किया करते थे। लेकिन एला की ज़िन्दगी में हमेशा एक चीज की कमी खलती थी वो थी, उसकी माँ जो उसे छोड़ कर भगवान् के घर चली गयी थी। एला की इस कमी को पूरा करने के लिए उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। एला की नयी माँ की दो बेटियां भी थी। एला बहुत खुश थी की उसे माँ के साथ साथ दो बेहेन भी मिल गयी थी। दोनों ही बहने बहुत ही घमंडी थी, लेकिन एला फिर भी उनसे बहुत प्यार करती थी और अपनी नयी माँ को भी बहुत चाहती थी। परन्तु एला की खुशियां ज़्यादा दिन तक टिक नहीं पायी।

CINDEREllA Ki KAHANI - क्यों पड़ा एला का नाम सिंडिरेल्ला?

एक दिन की बात है एला के पिता अपने काम से किसी दूसरे शहर गए, और  फिर कभी वापस नहीं आये। एला पर तो मानो मुश्किलों का पहाड़ टूट गया हो। पिता का साया सर से उठते ही उसकी माँ और बहने उसके घर की मालकिन बन गए और एला के साथ नौकरानियों जैसा बर्ताव करने लगे। उन्होंने घर के सारे नौकरों को निकाल दिया और अब एला से ही घर के सारे काम करवाती। उसकी बहनो ने तो उसका कमरा भी उस से चीन लिया और उसे एक कोठरी में रहने के लिए छोड़ दिया। एला अपनी बहनो के फाटे पुराने कपडे और जूते पहनती और सारा दिन उनके काम करती। कभी कभी तो एला इतनी थक जाती की अंगीठी के पास ही सो जाती। अक्सर एला जब सुबह उठती तो अंगीठी की राख (Cinder) उस पर पड़ी होती। उसकी बहने उसे सिंडर-एला कह कह के चिढ़ाती और इस तरह उसका नाम एला से सिंडिरेल्ला पड़ गया।

aap padh rahe hai cinderella ki kahani

एक दिन राज्य में ऐलान हुआ की महल में एक बहुत बड़ा आयोजन है और राज्य की सभी लड़कियों को बुलाया गया है ताकि राजकुमार अपनी पसंद की लड़की से शादी कर सके। राज्य की सारी लडकियां बहुत खुश और उत्साहित थी। सिंडिरेल्ला और उसकी बहने भी अपनी किस्मत आज़माने को बेचैन थी। लेकिन सिंडिरेल्ला की ये ख़ुशी उसकी सौतेली माँ को रास नहीं आई और उसने सिंडिरेल्ला को महल में जाने से मन कर दिया। बेचारी सिंडिरेल्ला दुखी मन से फिर अपने काम में लग गयी और सोचती रही, की इस वक़्त उसकी बहने क्या कर रही होंगी और राजकुमार देखने में कैसा होगा।

परी गॉडमदर और सिंडिरेल्ला की मुलाकात

सिंडिरेल्ला जब इन खयालो में खोई हुई थी, तभी वहाँ एक परी माँ आयी। उसने सिंडिरेल्ला को दुखी देखा तो उसकी मदद करनी चाहि। सिंडिरेल्ला ने सारी बात पारी  को बताई। परी ने सिंडिरेल्ला से कहा, “ओह! प्यारी सिंडिरेल्ला, मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ. ” ये कह कर उस पारी ने अपनी छड़ी घुमाई और वहां पड़े एक बड़े से कद्दू को एक बग्घी में बदल दिया। वहीँ चार चूहे उछाल कूद मचा रहे थे, उस पारी की नज़र उनपर पड़ी तो उसने चूहों को घोडा बना दिया। अब जरुरत थी एक कोचवान की। परी ने फिर से चारों तरफ नज़र घुमाई तो उसे एक मेंढक दिखा और उसे कोचवान में बदल दिया। सिंडिरेल्ला यह सब देख हैरान हो रही थी की तभी परी उसकी तरफ मुड़ी और अपनी जादू की छड़ी घुमा दी, और पलक झपकते ही सिंडिरेल्ला के मटमैले और फाटे हुए कपडे साफ़ और सुन्दर हो गयी। उसके पैरों में टूटी हुई चप्पल की जगह सुन्दर कांच की जूती आ गयी। अब सिंडिरेल्ला महल में जाने के लिए तैयार थी। परी ने सिंडिरेल्ला को विदा करते हुए कहा, “बेटी, तू अपनी इच्छा पूरी कर ले, लेकिन याद रखना रात 12 बजते ही यह सारा जादू ख़तम हो जाएगा।

CINDEREllA और उसका PRINCE CHARM

सिंडिरेल्ला जब महल पहुंची तो सबकी नज़रे उसी को देखने लगी। वो बहुत ही सुन्दर लग रही थी। राजकुमार ने जब उसके साथ डांस करना चाहा तो सिंडिरेल्ला की सौतेली बहनो के साथ साथ वहाँ मौजूद सभी लड़कियां सिंडिरेल्ला से जलने लगी। लेकिन कोई सिंडिरेल्ला को पहचान नहीं पाया। राजकुमार ने उसे देखते ही फैसला कर लिया था की वो इसी लड़की से शादी करेगा। सिंडिरेल्ला भी राजकुमार की आखों में ऐसी डूबी की उसे जादूगरनी की बात याद ही नहीं रही। देखते ही देखते 12 बज गए। घंटी बजते ही सिंडिरेल्ला को याद आया की 12 बजते ही जादू ख़त्म हो जाएगा। सिंडिरेल्ला बिना राजकुमार से कुछ कहे वहाँ से भाग निकली। वो नहीं चाहती थी की राजकुमार उसे उसके पुराने, गंदे कपड़ो में देखे और उस से नफरत करे। भागते वक़्त सिंडिरेल्ला की कांच की एक जूती महल में ही छूट गयी जो राजकुमार ने उठा ली। राजकुमार ने बहुत कोशिश की सिंडिरेल्ला को ढूंढने की लेकिन वो उसे कही नहीं मिली। सबने राजकुमार से उसे भूल जाने को कहा लेकिन राजकुमार सिंडिरेल्ला को भूल नहीं पा रहा था।

Cinderella ki kahani - With Prince Charming

आखिरकार सारे राज्य में घोषणा कर दी गयी की जिस लड़की के पैरों में वो जूती आएगी राजकुमार उसी से शादी करेंगे। राज्य में तो जैसे तूफ़ान आ गया था। हर लड़की राजकुमार से शादी करना चाहती थी। सभी लड़किया अपने आप को उस कांच की जूती की मालकिन बताने लगी। लड़कियों के घर जा जा कर उन्हें जूती पहनाई गयी लेकिन उनमे से किसी को भी वो पूरी नहीं आई। आखिर में सिंडिरेल्ला की बहनो की बारी आई। दोनों ने हर कोशिश की जूती पहनने की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब सबकी नज़रे सिंडिरेल्ला पर रुक गयी। सिंडिरेल्ला ने जब उसे पहना तो वो जूती उसके पैरों में ऐसे आ गयी जैसे उसी के लिए बानी हो। सिंडिरेल्ला की सौतेली माँ और बहने हैरान और परेशान हो गयी। किसी को भी उम्मीद नहीं थी की वो सुन्दर लड़की सिंडिरेल्ला हो सकती है।

CILNDEREllA's MARRIAGE और PRINCE CHARMING की शादी

राजकुमार ने जब सिंडिरेल्ला से शादी के लिए पूछा तो सिंडिरेल्ला ने ख़ुशी ख़ुशी हाँ कर दी। अगले ही दिन बड़ी धूम धाम के साथ सिंडिरेल्ला की शादी राजकुमार से हो गयी। राजकुमार और सिंडिरेल्ला एक दुसरे के साथ बहुत खुश थे और एक दुसरे को बहुत चाहते थे। दूसरी तरफ सिंडिरेल्ला की सौतेली माँ और बहनो को सिंडिरेल्ला के साथ बुरा व्यवहार करने के सजा के रूप में राज्य छोड़ कर जाना पड़ा।

Moral of THE STORY

तो दोस्तों Cinderella ki kahani से हमें क्या सीख मिलती है –

  1. हमेशा दयालु रहें, चाहे कुछ भी हो – क्योंकि आपकी थोड़ी सी दयालुता भी एक लम्बे समय तक आपका साथ देती है।
  2. बहादुर बनो और जीवन में जोखिम लेने से कभी मत डरो – हमें लाइफ में आगे बढ़ने  के लिए हमेशा जोखिम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए और परिस्थितियों से कभी नहीं घबराना चाहिए।
  3. अपने आप पर यकीन रखो – खुद पर यकीन रखना बहुत जरुरी है, अगर आपको खुद पर यकीन है तो यकीन मानिये आप पूरी लाइफ में कभी नहीं हारेंगे।
Close Menu
error: Content is protected !!