Pariyon ki Kahani

Pari ki kahani, आश्चर्यजनक कथा, जादू की कहानियां लोक-कथा शैली का एक उदाहरण है जो एक छोटी कहानी का रूप लेती है। इस तरह की कहानियों में आमतौर पर बौनों, ड्रेगन, काल्पनिक बौने, परियां, राक्षश, goblins, griffins, mermaids, बात करने वाले जानवरों, यूनिकॉर्न, जादूगर तथा चुड़ैल जैसे पात्र होते हैं। इन कहानियों में अधिकाँश जादू या मायाजाल होते हैं। Pariyon ki Kahani शब्द मुख्य रूप से यूरोपीय परंपरा में उत्पत्ति के साथ कहानियों के लिए उपयोग किया जाता है और कम से कम हाल की शताब्दियों में, ज्यादातर बच्चों के साहित्य से संबंधित है। हमारे देश में कथा-कहानियों की स्मृद्ध श्रृंखला के पीछे हमारा सामाजिक ताना-बाना तथा संयुक्त परिवारों का प्रचलन मुख्य कारण रहा है। हर पीढ़ी में बच्चे अपने घर के बड़े-बुजुर्गों, विशेषकर दादा-दादी के सान्निध्य में रहते और बढ़ते आए हैं।

दादा या दादी द्वारा घर के नन्हें-मुन्नों व उनकी मित्रमंडली को कहानी-किस्से सुनाने का यह सिलसिला शाम ढलते ही शुरू हो जाता है। बच्चे इसमें कुछ इस कदर डूब जाते हैं कि खाने-पीने की सुध भी नहीं रहती-ऐसा चुम्बकीय आकर्षण होता है इन कहानियों में।

बाद में इन्हीं कहानियों में कुफल या सुफल का समावेश हो गया, ताकि बच्चे मनोरंजन के साथ-साथ कुछ प्रेरणा भी ग्रहण कर सकें। दादा-दादी के मुख से निकलने वाली अधिकांश कहानियां हमारे प्राचीन भारतीय साहित्य का ही परिवर्तित स्वरूप हैं। धीरे-धीरे इसमें विश्व-प्रसिद्ध कथाओं का भी समावेश हो गया जैसे की Pariyon ki kahani, Raja Rani ki Kahani, Bhoot ki kahani इत्यादि। बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा देकर उनका आत्मिक व मानसिक विकास करने वाली ऐसी ही चुनिंदा कहानियों को पेश किया है हमने “Pariyon ki Kahani” के इस खजाने के रूप में।

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