Rapunzel ki kahani – Ek Prem Katha

राजकुमारी रॅपन्ज़ेल की कहानी एक जर्मन परि-कथा है जिसे मूल रूप से ब्रदर्स ग्रिम ने अपनी पुस्तक, द ब्रदर्स ग्रिम फेयरी टेल्स कलेक्शन में लिखा है। Rapunzel ki kahani मूल रूप से 1698 में प्रकाशित Charlotte-Rose de Caumont de La Force द्वारा लिखित परि कथा पर्सीनेट का रूपांतरण है।

Aaiye jaante hai Rajkumari Rapunzel ki kahani...

बहुत समय पहले की बात है यूरोप महाद्वीप के जर्मनी देश में एक पति और पत्नी रहा करते थे। दोनों का एक दूसरे के सिवा और कोई नहीं था। विवाह के कई वर्षों उपरांत भी उनकी कोई संतान नहीं हुई। समय इसी प्रकार से गुजर रहा था कि अचानक एक दिन स्त्री को अपनी कोख में संतान की अनुभूति हुई और गर्भावस्था के दौरान उसको कुछ इस प्रकार महसूस हुआ कि उसको रॅपन्ज़ेल नामक साग खानी चाहिए। आसपास वह साग कहीं भी उपलब्ध नहीं थी। पति पत्नी एक जादूगरनी के बगीचे के समीप ही रहते थे। पत्नी के मन की बात जब पति ने सुनी तो पति ने उससे वादा किया कि वह उसके लिए Rapunzel नाम की वह साग साथ लेकर आएगा। बगीचे में चोरी से घुसकर उसने वह साग अपनी पत्नी के लिए तोड़ी और यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा।

एक दिन बगीचे की मालकिन जादूगरनी ने, जिसका नाम डेम गोथेल था, उसे यह चोरी करते हुए देख लिया और जादूगरनी ने पति को बंधक बना लिया जिससे वह डर गया और  जादूगरनी के सामने बहुत गिड़गिड़ाया और अंततः जादूगरनी एक शर्त पर वह साग उसकी पत्नी के लिए देने के लिए राजी हो गई। शर्त यह थी कि संतान के जन्म के बाद वह उसे जादूगरनी को सौंप देगा। मायूस मन से पति ने उसकी वह बात मान ली और बच्चे के जन्म होते ही उसने जादूगरनी के हाथों अपनी परी जैसी पुत्री को सौंप दिया। जादूगरनी ने अत्यंत मनोयोग से उसकी पुत्री का पालन पोषण किया और उसका नाम उसी साग के नाम पर रॅपन्ज़ेल रखा। रॅपन्ज़ेल एक अत्यंत रूपवती कन्या के रूप में धीरे धीरे विकसित होने लगी। उसके सुनहरे बाल और अद्वितीय रूप की चर्चा आसपास की जगह पर धीमे-धीमे से फैलने लगी।

कन्या के 12 वर्ष के होते ही जादूगरनी डेम गोथेल ने उसको एक ऐसी मीनार में कैद कर दिया, जिसमें ना तो कोई दरवाजा था और ना चढ़ने के लिए ही कोई सीढ़ी। इसमें एक ऊंचे स्थान पर एक कमरा था, जिसमें कि केवल एक खिड़की थी. जादूगरनी अपनी जादुई शक्तियों के माध्यम से छोटी बच्ची तक पहुंचती और हर दिन उससे मिलने के लिए दिन के समय जरुर जाती। इसी प्रकार से दिन बीतने लगे वह बच्ची बड़ी होकर एक अत्यंत रूपवती स्त्री के रूप में विकसित हुई। उसके लंबे घने सुनहरे बाल इतने लंबे हो गए की बाद में जादूगरनी उनके सहारे मीनार पर चढ़कर कमरे में आने और जाने लगी। ऐसा करते वक्त वह रॅपन्ज़ेल को पुकारते हुए कहती – “रॅपन्ज़ेल अपने बाल गिराओ, ताकि मैं तुम्हारे सुनहरे बालों पर चढ़कर ऊपर आ सकूं।”

keise mile Rapunzel or Rajkumar

समय इसी तरह से गुजरता गया और एक दिन किसी राज्य का राजकुमार घूमते घूमते उसी क्षेत्र में आ गया, जहां पर रॅपन्ज़ेल उस मीनार में रहती थी। Rapunzel की आवाज में अद्वितीय मिठास थी, जब वह गाती थी तो जैसे समय ठहर जाता था। एक दिन राजकुमार को टहलते टहलते एक मधुर आवाज़ सुनाई पड़ी। वह आवाज कहां से आ रही है यह जानने के लिए जब राजकुमार मीनार के पास गया तो उसे दिखाई पड़ा कि एक ऊंची मीनार के ऊपर कमरे में एक सुंदर रूपवती स्त्री रहती है। उसकी इस मीठी आवाज को सुनकर राजकुमार उसकी तरफ अत्यंत आकर्षित हुआ और वह अपनी उत्सुकता पर काबू नहीं रख सका। उसने मन में ठान ली कि वह इस बंद मीनार में रहने वाली स्त्री, जिसकी आवाज इतनी मधुर है, के विषय में जान के ही रहेगा। एक दिन जब दिन के समय जादूगरनी रॅपन्ज़ेल से मिलने के लिए आई तो उसने जादूगरनी को वह शब्द कहते और बालों के जरिए ऊपर चढ़ते हुए देख लिया। राजकुमार ने इसी प्रकार जब रात के समय रॅपन्ज़ेल को पुकारा तो उसने उसे आने के लिए मीनार के सहारे अपने बालों को लटका दिया। राजकुमार ऊपर जाकर रॅपन्ज़ेल से मिला।

रॅपन्ज़ेल और राजकुमार एक दूसरे से प्रेम करने लगे थे। दोनों ने मिलते ही एक-दूसरे को पसंद कर लिया था और वह एक दूसरे के लिए के अंतरंग सहचर बन गए। अतः राजकुमार ने Rapunzel के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। रॅपन्ज़ेल इस पर सहमत हुई और दोनों का मिलना जुलना धीमे-धीमे बढ़ने लगा। जादूगरनी डेम गोथेल रोज दिन के समय रॅपन्ज़ेल को मिलने के लिए आया करती थी। राजकुमार और रॅपन्ज़ेल ने मिलकर एक योजना बनाई कि राजकुमार द्वारा दिए गए रेशम से रॅपन्ज़ेल एक सीढ़ी बनायेगी, जिससे कि वह दोनों उस जगह से भाग सकें। रॅपन्ज़ेल की मूर्खता के कारण जादूगरनी डेम गोथेल को राजकुमार के रॅपन्ज़ेल के पास आने और उसके गर्भवती हो जाने का पता चल गया। जादूगरनी डेम गोथेल ने रॅपन्ज़ेल को मीनार से बाहर निकाल दिया और जंगली जानवरों के बीच से जंगल में विचरने को अकेला छोड़ दिया, और वह स्वयं उस मीनार के कमरे में जाकर छुप गयी। राजकुमार के चढ़ने के लिए उसने रॅपन्ज़ेल के बालों को काटकर उन्हें मीनार से बाहर लटका दिया ताकि राजकुमार ऊपर चढ़ सके और उसे कोई शंका ना हो। जब राजकुमार Rapunzel से मिलने के लिए उस रात आया तो रॅपन्ज़ेल की जगह जादूगरनी को पाकर वह भयभीत हो गया और मीनार से कूद पड़ा जिससे कि नीचे पड़े काटों से उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। जब राजकुमार नीचे गिरने लगा उसके हाथ में रॅपन्ज़ेल के कटे हुए बाल आ गए और रॅपन्ज़ेल की लंबी बालों की लट राजकुमार के साथ ही नीचे गिर गई। नीचे उतर पाने का कोई अन्य तरीका न होने के कारण जादूगरनी डेम गोथेल उस मीनार में फंस गई और अंततः मृत्यु को प्राप्त हुई।

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अपनी आंखों और अपनी प्रेमिका को खो देने के बाद राजकुमार निराश होकर अंधा होकर जगह-जगह भटकने लगा। कई महीनों तक इस प्रकार भटकने के पश्चात वह उस क्षेत्र में जा पहुंचा जहां पर रॅपन्ज़ेल बस चुकी थी। उधर रॅपन्ज़ेल ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया; जिनमें एक बेटी और एक बेटा हुआ। इसी तरह कुछ समय तक एक दूसरे के विछोह में रहने के बाद अंततः दोनों उसी राज्य में एक स्थान पर मिले, और उनके मिलन से चमत्कार स्वरुप राजकुमार की दृष्टि वापस आ गई और रॅपन्ज़ेल के लंबे सुनहरे बाल उसको वापस मिल गए और दोनों हंसी खुशी अपना जीवन साथ में बिताने लगे।

तो दोस्तों ये थी Princess Rapunzel ki kahani। आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं की कैसी लगी आपको ये कहानी। हम आपके लिए ऐसी ही कहानियां ( राजा रानी की कहानियां, Pariyon ki kahani, Bhoot ki kahani) हमेशा लाते रहेंगे।

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