SONPARI AUR MOCHI

Sonpari aur Mochi  – एक गरीब ईमानदार मोची की कहानी है, उसे उसकी मेहनत का फल कैसे मिला आईये जानते हैं।

एक नगर में एक मोची रहता था। वो बहुत ही गरीब था और वो जूते बनाता और उसे बाजार में बेचकर किसी तरह से अपना घर चलता था। लेकिन वो बहुत साहसी और ऑनेस्ट था। वो सोचता था एक न एक दिन उसकी तक़दीर भी जरूर बदलेगी और भगवान् उसकी भी सुनेगा और वो एक न एक दिन अमीर आदमी बनेगा। काफी दिन बीत गए लेकिन उसके हालत जस के तस थी। इससे वो बहुत निराश हो गया। वो अपनी दूकान बंद करके सारा सामान घर लाये और निराश होकर सो गया। कुछ समय बाद उसकी पत्नी आयी और उससे भोजन करने के लिए बोलने लगी। लेकिन मोची ने मना कर दिया और कहा, इस तरह कब तक चलेगा। अब हमारे पास घर चलाने के लिए भी पैसे नहीं है क्या हम हमेसा गरीब रहेंगे हमने क्या गलती की है, मैं इतनी ईमानदारी से अपना धंदा करता हु। इसके बाऊजुद भी उसमे कुछ फायदा नहीं हो रहा है…

तब उसकी पत्नी ने कहा, भगवान् पर भरोसा रखो सब कुछ सही होगा इस तरह से भोजन छोड़ने से कुछ फायदा नहीं होगा। उसके बाद उसने भोजन किया और दोनों सो गए। यह सब बाते सोनपरी सुन रही थी। उसने सोचा ये तो बहुत गलत हो रहा है मुझे इनकी मदद करनी चाहिए। उसके बाद सोनपरी मोची के घर में आयी और उसके जूतों को शानदार चमकदार जुते बना दिये। सुबह जब मोची उठा तो उसने चमकदार जूता देखा उसने सोचा ऐसा कैसे हो सकता है, ये जूता भला यहाँ कैसे आया। तब तक उसकी पत्नी भी वहाँ पर पहुंच गयी उसने मोची से कहा, ये सब भगवन की कृपा है। भगवान् ने हमारी बात सुन ली है आप इसे बाजार ले जाइये और बेच दें। तब मोची उस जुते को बाजार ले गया और वो जूता बहुत ही महंगे दाम में बिका। इससे मोची बहुत खुश हुआ। उसने और जुटे बनाने के लिए चमड़े भी ख़रीदे। रात हुई और सोनपरी फिर वापस आयी। उसने बहुत सारे वैसे ही चमकीले जुटे बना दिए। मोची ने सुबह देखा तो सारे वैसे ही चमकीले जुते रखे हुए थे। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने सोचा ऐसा कौन कर रहा है। उसने अपनी पत्नी से कहा की हमे इस बारे में जरूर पता लगाना चाहिए, उसकी पत्नी भी इससे सहमत हुई…

KAISE MILE SONPARI AUR MOCHI

उसके बाद मोची बाजार गया और इस बार भी उसके जुते मंहगे दामों में बिक गए। उसने और भी चमड़ा खरीदा और घर लौट आया। अब उसके पास कुछ पैसे भी इकठ्ठा हो गए थे। रात हुई मोची और उसकी पत्नी छुपकर उस कमरे पर नजर रखने लगे। उन्होंने देखा की रात को सोनपरी आयी और सारे चमड़े के जुत्तों को चमकदार जुटे में तब्दील कर दिया। मोची और उसकी पत्नी आश्चर्य – चकित रह गए। वो दोनों तुरंत ही उस कमरे में पहुंच गए और उनके आते ही सोनपरी ने कहा कैसे है आप लोग, उम्मीद है अब आप लोग खुश होंगे। तब मोची ने कहा आपका बहुत – बहुत धन्यवाद। आपने हम गरीबो की बहुत मदद की है। अब हम भी आपको कुछ उपहार देना चाहते है। उसके बाद मोची ने सोनपरी को छोटा सा खूबसूरत जूता दे दिया। सोनपरी बहुत खुश हुयी। उसने एक रिंग मोची को दी और कहा जब भी किसी जुते  को बनाओ तो उसमे इस रिंग को छुआ देना इससे वो जूता सूंदर और चमकदार हो जाएंगे और फिर आप उसे अच्छे दामों में किट में बेच सकोगे। ये कहकर सोनपरी वह से चली गयी। उसके बाद मोची ने ऐसा ही किया और जल्द ही वो बहुत ही अमीर व्यापारी बन गया…

तो दोस्तों ये थी Sonprai aur Mochi की कहानी। आप सभी को ये कहानी कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ।

 

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